शब-ए-बराअत नौ अप्रैल को है। कानपुर के लोग विभिन्न खाड़ी और यूरोपीय देशों में नौकरी करते हैं। वे शब-ए-बराअत के मौके पर शहर आकर अपने पुरखों की कब्रों पर फातिहा पढ़ने जाते हैं। ऑल इंडिया गरीब नवाज कौंसिल के कौमी सदर मौलाना मो. हाशिम अशरफी ने कहा कि जो जहां है वहीं घर में फातिहा ख्वानी कर ले और कब्रिस्तानों में न जाएं।
उधर, इस मौके पर आने वाले तकरीबन डेढ़ सौ लोगों ने अपनी फ्लाइट के टिकट निरस्त करा दिए हैं। कोरोना के संक्रमण के बचाव के लिए देश में चल रहे लॉकडाउन को लेकर उलमा ने अपील जारी की है कि शब-ए-बराअत पर अपने घर में रह कर इबादत करें।
इसका सवाब अपने बुजुर्गों को बख्शें और उनकी मगफिरत की अल्लाहताला से दुआ करें। शरीअत भी वबा से जान बचाने का हुक्म देती है। जो लापरवाही करता है और संक्रमण की चपेट में आकर मरता है तो उसे खुदकुशी माना जाएगा।
खुदकुशी करके जान देना इस्लाम में हराम और गुनाह है। कानूनी रूप से भी यह अपराध है। विदेशों से न आ पाने वालों ने उलमा से मशविरा किया। इस पर इबादत, नफिल नमाजों में मशगूल रहने का मशविरा दिया गया है।
अभी निकालें सदका और जकात
अमूमन रमजान के दौरान निकाले जाने वाले सदका और जकात के लिए उलमा ने राय दी है कि वह रकम अभी निकाल कर लोगों की मदद करें। पड़ोसियों का ख्याल रखें और किसी को भूखा न सोने दें। ज्यादा से ज्यादा सदका निकालें और जकात अदा कर दें। इससे परेशान लोगों और मजबूरों की मदद हो सकेगी।